हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.92.3

कांड 6 → सूक्त 92 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 92
त॒नूष्टे॑ वाजिन्त॒न्वं नय॑न्ती वा॒मम॒स्मभ्यं॒ धाव॑तु॒ शर्म॒ तुभ्य॑म् । अह्रु॑तो म॒हो ध॒रुणा॑य दे॒वो दि॒वीव॒ ज्योतिः॒ स्वमा मि॑मीयात् ॥ (३)
हे वेगवान अश्व! सवार के शरीर को युद्धभूमि में पहुंचाता हुआ तेरा शरीर हमें धन प्राप्त कराए तथा तुझे सुख पहुंचाता हुआ दौड़े. तू खाली स्थान में फैले गांव, जनपद आदि को धारण करने के लिए सीधा चलता हुआ इस प्रकार अपने स्थान को जा, जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश अपने स्थान पर पहुंचता है. (३)
O fast horse! While taking the rider's body to the battlefield, your body will give us wealth and run to bring you happiness. You go straight to your place to hold the village, district etc. spread in the empty space, just as the light of the sun reaches its place. (3)