हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.92.2

कांड 6 → सूक्त 92 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 92
ज॒वस्ते॑ अर्व॒न्निहि॑तो॒ गुहा॒ यः श्ये॒ने वात॑ उ॒त योऽच॑र॒त्परी॑त्तः । तेन॒ त्वं वा॑जि॒न्बल॑वा॒न्बले॑ना॒जिं ज॑य॒ सम॑ने पारयि॒ष्णुः ॥ (२)
हे अश्व! तेरा वेग असाधारण स्थान गुफा में छिपा है. तेरा जो वेग बाज पक्षी और वायु में सुरक्षित है, तू उसी वेगशाली बल से बलवान हो कर हमें संग्राम में सफलता दिला. (२)
O horse! Your velocity extraordinary location is hidden in the cave. Your velocity, which is safe in the bird and the air, you should be strong with the same fast force and give us success in the struggle. (2)