हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.114.3

कांड 7 → सूक्त 114 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 114
अ॑प्स॒रसः॑ सध॒मादं॑ मदन्ति हवि॒र्धान॑मन्त॒रा सूर्यं॑ च । ता मे॒ हस्तौ॒ सं सृ॑जन्तु घृ॒तेन॑ स॒पत्नं॑ मे कित॒वं र॑न्धयन्तु ॥ (३)
जुए की देवियां अप्सराएं भूलोक और अंतरिक्षलोक में एक साथ प्रसन्न होती हैं. वे अप्सराएं मेरे दोनों हाथों को जय लक्षण फल से संयुक्त करें तथा मेरे विरोधी जुआरी को मेरे वश में करें. (३)
The goddesses of gambling, nymphs, delight together in the land and space. May those nymphs combine both my hands with jai symptom fruit and subdue my opposing gambler. (3)