हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.114.4

कांड 7 → सूक्त 114 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 114
आ॑दिन॒वं प्र॑ति॒दीव्ने॑ घृ॒तेना॒स्माँ अ॒भि क्ष॑र । वृ॒क्षमि॑वा॒शन्या॑ जहि॒ यो अ॒स्मान्प्र॑ति॒दीव्य॑ति ॥ (४)
मैं अपने विरोधी जुआरी को जीतने के लिए पासों के द्वारा जुआ खेलता हूं. हे जुए से संबंधित देवियो! मुझे सारपूर्ण विजय से युक्त कराओ. जो जुआरी मुझे जीतने के लिए मेरे विरोध में जुआ खेलता है, उस का उसी प्रकार विनाश करो, जिस प्रकार बिजली सूखे वृक्ष का विनाश कर देती है. (४)
I gamble with dice to win over my opponent gambler. O ladies related to gambling! Make me full of perfect victory. Destroy the gambler who gambles against me to conquer me, just as lightning destroys a dry tree. (4)