हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.18.2

कांड 7 → सूक्त 18 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
धा॒ता द॑धातु दा॒शुषे॒ प्राचीं॑ जी॒वातु॒मक्षि॑ताम् । व॒यं दे॒वस्य॑ धीमहि सुम॒तिं वि॒श्वरा॑धसः ॥ (२)
धाता देव हवि देने वाले मुझ यजमान को हमारे अभिमुख आने वाली, जीवनदायिनी एवं क्षीण न होने वाली सुमति प्रदान करें. हम भी क्षीण न होने वाले धन को धारण करने वाले धाता देव की अनुग्रह बुद्धि धारण करें. (२)
May Dhata Dev give me the consent that comes in front of us, gives life-giving and non-diminishing consent to me. Let us also wear the grace and wisdom of Dhata Dev, who holds wealth that does not diminish. (2)