हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
धा॒ता द॑धातु नो र॒यिमीशा॑नो॒ जग॑त॒स्पतिः॑ । स नः॑ पू॒र्णेन॑ यच्छतु ॥ (१)
~ सभी साधनों से युक्त एवं जगत्‌ के पालक धाता देव हमारे लिए धन प्रदान करें. वे धाता देव हमें पूर्ण और समृद्ध करें. (१)
~ May Dhata Dev, the guardian of all means and the guardian of the world, provide wealth for us. May he, Dhata Dev, complete and enrich us. (1)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
धा॒ता द॑धातु दा॒शुषे॒ प्राचीं॑ जी॒वातु॒मक्षि॑ताम् । व॒यं दे॒वस्य॑ धीमहि सुम॒तिं वि॒श्वरा॑धसः ॥ (२)
धाता देव हवि देने वाले मुझ यजमान को हमारे अभिमुख आने वाली, जीवनदायिनी एवं क्षीण न होने वाली सुमति प्रदान करें. हम भी क्षीण न होने वाले धन को धारण करने वाले धाता देव की अनुग्रह बुद्धि धारण करें. (२)
May Dhata Dev give me the consent that comes in front of us, gives life-giving and non-diminishing consent to me. Let us also wear the grace and wisdom of Dhata Dev, who holds wealth that does not diminish. (2)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
धा॒ता विश्वा॒ वार्या॑ दधातु प्र॒जाका॑माय दा॒शुषे॑ दुरो॒णे । तस्मै॑ दे॒वा अ॒मृतं॒ सं व्य॑यन्तु॒ विश्वे॑ दे॒वा अदि॑तिः स॒जोषाः॑ ॥ (३)
धाता देव वरण करने योग्य समस्त फलों को धारण करें. वे फल प्राप्ति की इच्छा करने वाले यजमान के हेतु हों. उस यजमान के लिए इंद्र आदि अमृत प्रदान करें. वे सभी देव एवं देवमाता अदिति परस्पर मिल कर प्रयत्नशील हों. (३)
Wear all the fruits that are eligible for selection. They should be for the host who wants to get the fruit. Provide nectar like Indra etc. for that host. All those Gods and Goddess Aditi are trying together. (3)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 18
धा॒ता रा॒तिः स॑वि॒तेदं जु॑षन्तां प्र॒जाप॑तिर्नि॒धिप॑तिर्नो अ॒ग्निः । त्वष्टा॒ विष्णुः॑ प्र॒जया॑ संररा॒णो यज॑मानाय॒ द्रवि॑णं दधातु ॥ (४)
सभी कल्याणों के देने वाले धाता, कमों के प्रेरक सविता और वेदों के रक्षक प्रजापति, अग्नि, रूपों के निर्माता त्वष्टा, व्यापक देव विष्णु-ये सभी हमारे हवि को स्वीकार करें एवं यज्ञ करने वाले यजमान के लिए धन दें. (४)
The giver of all welfare, Savita, the motivator of the kamon and Prajapati, the protector of the Vedas, the creator of agni, forms, the comprehensive god Vishnu - all of them should accept our havi and give money for the host who performs the yajna. (4)