हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.21.5

कांड 7 → सूक्त 21 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 21
एमं य॒ज्ञमनु॑मतिर्जगाम सुक्षे॒त्रता॑यै सुवी॒रता॑यै॒ सुजा॑तम् । भ॒द्रा ह्यस्याः॒ प्रम॑तिर्ब॒भूव॒ सेमं य॒ज्ञम॑वतु दे॒वगो॑पा ॥ (५)
अनुमति देवी हमारे द्वारा दिए जाते हुए यज्ञ में आएं. वे हमें उत्तम फल देने वाली हों. हे विश्वधारा तथा हे सुभगा अनुमति! हमें उत्तम संतान वाला धन प्रदान करो. (५)
The goddess should come to the yagna given by us. May they give us the best results. O world stream and this beautiful permission! Give us wealth with good children. (5)