अथर्ववेद (कांड 7)
इ॒दं यत्कृ॒ष्णः श॒कुनि॑र॒वामृ॑क्षन्निरृते ते॒ मुखे॑न । अ॒ग्निर्मा॒ तस्मा॒देन॑सो॒ गार्ह॑पत्यः॒ प्र मु॑ञ्चतु ॥ (२)
हे मृत्युदेवता! काले पक्षी अर्थात् कौए ने जो अपने मुख से मेरे अंग को स्पर्श किया है, उस से होने वाले पाप से मुझे गार्हपत्य नामक अग्नि बचाएं. (२)
O God of death! Save me a agni called Garhapatya from the sin caused by the black bird i.e. the crow that has touched my limb with its mouth. (2)