अथर्ववेद (कांड 7)
प्र॑ती॒चीन॑फलो॒ हि त्वमपा॑मार्ग रु॒रोहि॑थ । सर्वा॒न्मच्छ॒पथाँ॒ अधि॒ वरी॑यो यावया इ॒तः ॥ (१)
हे अपामार्ग अर्थात् चिरचिटा के झाड़! तुम सामने की ओर मुख वाले फलों के रूप में उगे हो, इस कारण मेरे सभी दोषों को मुझ से अत्यधिक दूर करो. (१)
O Apamarga, that is, the tree of Chirchita! You have grown as fruits facing the front, so remove all my defects from me too much. (1)