अथर्ववेद (कांड 7)
यद्दु॑ष्कृ॒तं यच्छम॑लं॒ यद्वा॑ चेरिम पा॒पया॑ । त्वया॒ तद्वि॑श्वतोमु॒खापा॑मा॒र्गाप॑ मृज्महे ॥ (२)
हमने जो दुष्कर्म, पाप एवं मलिन आचरण किया है, हे सभी ओर शाखाओं वाले अपामार्ग अर्थात् चिरचिटा के झाड़! तेरे द्वारा हम उसे दूर करते हैं. (२)
The misdeeds, sins and defiles we have committed, O branches on all sides, that is, the tree of chirchita! Through you we remove him. (2)