हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.77.4

कांड 7 → सूक्त 77 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 77
यदु॒स्रिया॒स्वाहु॑तं घृ॒तं पयो॒ऽयं स वा॑मश्विना भा॒ग आ ग॑तम् । माध्वी॑ धर्तारा विदथस्य सत्पती त॒प्तं घ॒र्मं पि॑बतं रोचने दि॒वः ॥ (४)
गोशाला में स्थित गायों में वर्तमान जो घृत का उत्पादक दूध है, वह यज्ञ के पात्र में डाल दिया गया है. वह तुम दोनों का भाग है, इसीलिए आओ. हे मधु विद्या के ज्ञाता अश्विनीकुमारो! तुम यज्ञ के धारण कर्ता हो. हे देवों का पालन करने वाले अश्चिनीकुमारो! द्युलोक के प्रकाशक अग्नि में तपाए हुए घी का पान करो. (४)
The current ghee-producing milk in the cows located in the gaushala has been put in the vessel of the yagna. He's part of both of you, that's why come. O Ashwini Kumaro, the knower of Madhu Vidya! You are the possessor of yajna. O Ashchinikumars who follow the gods! Drink ghee heated in the agni, the publisher of Dulok. (4)