अथर्ववेद (कांड 7)
नवो॑नवो भवसि॒ जाय॑मा॒नोऽह्नां॑ के॒तुरु॒षसा॑मे॒ष्यग्र॑म् । भा॒गं दे॒वेभ्यो॒ वि द॑धास्या॒यन्प्र च॑न्द्रमस्तिरसे दी॒र्घमायुः॑ ॥ (२)
हे चंद्रमा! तू शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा आदि तिथियों में उत्पन्न होता हुआ नवीन बनता है. झंडे के समान दिनों का परिचय कराता हुआ तू रात्रियों के आगेआगे चलता है. हे चंद्रमा! इस प्रकार ह्लास और वृद्धि के द्वारा पखवाड़े के अंत को प्राप्त हुआ तू हवि का विभाग करता है. इस प्रकार तू दीर्घ आयु धारण करता है. (२)
O moon! You become new born on the pratipada etc. dates of Shukla Paksha. You walk ahead of the nights, introducing days like a flag. O moon! Thus achieved at the end of the fortnight by halas and growth does the division of Havi. In this way you have a long life. (2)