अथर्ववेद (कांड 7)
यो॑३ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मस्तस्य॒ त्वं प्रा॒णेना प्या॑यस्व । आ व॒यं प्या॑सिषीमहि॒ गोभि॒रश्वैः॑ प्र॒जया॑ प॒शुभि॑र्गृ॒हैर्धने॑न ॥ (५)
हे सोम! जो शत्रु हम से द्वेष करता है अथवा जिस शत्रु से हम द्वेष करते हैं, तुम उस शत्रु के प्राणों का अपहरण करो. हम गायों, अश्वी, प्रजाओं, पशुओं, धनों और घटों से युक्त (५)
O Mon! The enemy who hates us or the enemy we hate, you kidnap the life of that enemy. We are full of cows, horsemen, subjects, animals, wealth, and sickness.