अथर्ववेद (कांड 7)
प्रास्मत्पाशा॑न्वरुण मुञ्च॒ सर्वा॒न्य उ॑त्त॒मा अ॑ध॒मा वा॑रु॒णा ये । दुः॒ष्वप्न्यं॑ दुरि॒तं निः ष्वा॒स्मदथ॑ गच्छेम सुकृ॒तस्य॑ लो॒कम् ॥ (४)
हे वरुण! तुम्हारे जो उत्तम और अधम पाप हैं, उन सब पापों से हमें छुड़ाओ. दुःस्वप्न में होने वाले पाप को भी हम से दूर करो. पापहीन हो कर हम पुण्य के लोक में पहुंचें. (४)
O Varuna! Redeem us from all your good and sins. Remove the sin in the nightmare from us. Sinless, let us reach the land of virtue. (4)