हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.94.4

कांड 7 → सूक्त 94 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 94
एधो॑ऽस्येधिषी॒य स॒मिद॑सि॒ समे॑धिषीय । तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धेहि ॥ (४)
हे अग्नि! तुम दीप्त होते हो, इस के फल के रूप में मैं समृद्ध बनूं. हे अग्नि! तुम तेज रूप हो, इसीलिए मुझ में भी तेज धारण करो. (४)
O agni! You are bright, as a fruit of this, may I become prosperous. O agni! You are a sharp form, that is why wear fast in me too. (4)