हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.95.1

कांड 7 → सूक्त 95 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 95
अपि॑ वृश्च पुराण॒वद्व्र॒तते॑रिव गुष्पि॒तम् । ओजो॑ दा॒स्यस्य॑ दम्भय ॥ (१)
हे अग्नि! तुम पुराने शत्रुओं के समान इस समय भी जार रूप शत्रु का उसी प्रकार विनाश करो, जिस प्रकार लताओं के समूह को काट देते हैं. (१)
O agni! Like the old enemies, destroy the enemy in the form of jars at this time, in the same way as you cut off a group of vines. (1)