हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 8.10.8

कांड 8 → सूक्त 10 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
तं पुण्यं॑ गन्धं ग॑न्धर्वाप्स॒रस॒ उप॑ जीवन्ति॒ पुण्य॑गन्धिरुपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (८)
गंधर्व और अप्सराएं उस पुण्यगंध को अपने जीवन का सहारा बनाते हैं. जो इस बात को जानता है, वह सब को जीवन का आश्रय देने वाला बनता है. (८)
Gandharvas and Apsaras make that punyagandha the support of their lives. He who knows this becomes the shelter of life for all. (8)