हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.15.18

कांड 9 → सूक्त 15 → मंत्र 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 15
ऋ॒चो अ॒क्षरे॑ पर॒मे व्योम॒न्यस्मि॑न्दे॒वा अधि॒ विश्वे॑ निषे॒दुः । यस्तन्न वेद॒ किमृ॒चा क॑रिष्यति॒ य इत्तद्वि॒दुस्ते॑ अ॒मी समा॑सते ॥ (१८)
परम व्योम में ओंकार का अक्षर है. उस में समस्त देव निवास करते हैं. जो इस बात को नहीं जानता, वह वेद मंत्रों को जान कर भी क्या करेगा? जो इस बात को जानते हैं, वे उसी ब्रह्म में निवास करते हैं. (१८)
Param Vyom has the letter Omkar. All the gods reside in it. What will one who does not know this do even after knowing the Veda mantras? Those who know this reside in the same Brahman. (18)