हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.108.5

मंडल 1 → सूक्त 108 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 108
यानी॑न्द्राग्नी च॒क्रथु॑र्वी॒र्या॑णि॒ यानि॑ रू॒पाण्यु॒त वृष्ण्या॑नि । या वां॑ प्र॒त्नानि॑ स॒ख्या शि॒वानि॒ तेभिः॒ सोम॑स्य पिबतं सु॒तस्य॑ ॥ (५)
हे इंद्र और अग्नि! तुमने जो वीरता के काम किए हैं, जिन दिखाई देने वाले जीवों की सृष्टि एवं वर्षा आदि कर्म किए हैं तथा तुम दोनों की प्राचीन कल्याणकारी मित्रता है, उन सबके सहित आकर निचोड़ा हुआ सोमरस पिओ. (५)
O Indra and Agni! Come and drink the squeezed somers along with all the acts of heroism you have done, the works of creation and rain of visible beings, and the ancient welfare friendship of both of you. (5)