हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.124.12

मंडल 1 → सूक्त 124 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 124
उत्ते॒ वय॑श्चिद्वस॒तेर॑पप्त॒न्नर॑श्च॒ ये पि॑तु॒भाजो॒ व्यु॑ष्टौ । अ॒मा स॒ते व॑हसि॒ भूरि॑ वा॒ममुषो॑ देवि दा॒शुषे॒ मर्त्या॑य ॥ (१२)
हे उषा! तुम्हारे प्रकट होते ही पक्षी अपने घोंसलों से उड़ने लगते हैं और मनुष्य अन्न प्राप्ति की इच्छा से अपने-अपने कर्म में उन्मुख होते हैं. हे देवी उषा! जो हव्यदाता यजमान देवयजन मंडप में स्थित है, उसके लिए पर्याप्त धन दो. (१२)
Oh, Usha! As soon as you appear, birds start flying from their nests and humans are oriented in their own karma by the desire to obtain food. O Goddess Usha! Give enough money for the havandata host which is located in the Devayjan Mandap. (12)