ऋग्वेद (मंडल 1)
अ॒भ्रा॒तेव॑ पुं॒स ए॑ति प्रती॒ची ग॑र्ता॒रुगि॑व स॒नये॒ धना॑नाम् । जा॒येव॒ पत्य॑ उश॒ती सु॒वासा॑ उ॒षा ह॒स्रेव॒ नि रि॑णीते॒ अप्सः॑ ॥ (७)
उषा बिना भाई की बहिन के समान पश्चिम की ओर मुख करके चलती है तथा पतिहीना नारी के समान प्रकाश रूप धन प्राप्त करने के लिए आकाश में चढ़ती है. उषा पति को प्रसन्न करने वाली पत्नी के समान सुंदर वस्त्र पहनकर हास्य द्वारा अपने दांतों का प्रदर्शन करती है. (७)
Usha walks facing west like a brother's sister and the husband climbs into the sky to get wealth as a light as a woman. Usha flaunts her teeth with humour wearing beautiful clothes like the wife who pleases her husband. (7)