ऋग्वेद (मंडल 10)
सूर्यो॑ नो दि॒वस्पा॑तु॒ वातो॑ अ॒न्तरि॑क्षात् । अ॒ग्निर्नः॒ पार्थि॑वेभ्यः ॥ (१)
सूर्य द्युलोक की बाधाओं से, वायु अंतरिक्ष की बाधाओं से तथा अग्नि पृथ्वी की बाधाओं से हमारी रक्षा करें. (१)
Protect us from the obstacles of the sun, from the obstacles of air space and from the obstacles of the agni earth. (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
जोषा॑ सवित॒र्यस्य॑ ते॒ हरः॑ श॒तं स॒वाँ अर्ह॑ति । पा॒हि नो॑ दि॒द्युतः॒ पत॑न्त्याः ॥ (२)
हे सविता! हमारी स्तुतियां स्वीकार करो. तुम्हारा तेज अनेक यज्ञों को पाने की योग्यता रखता है. तुम शत्रुओं के गिरते हुए उज्ज्वल आयुधों से हमारी रक्षा करो. (२)
O Savita! Accept our praises. Your speed is capable of getting many yagnas. You protect us from the falling bright weapons of enemies. (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
चक्षु॑र्नो दे॒वः स॑वि॒ता चक्षु॑र्न उ॒त पर्व॑तः । चक्षु॑र्धा॒ता द॑धातु नः ॥ (३)
सविता देव, पर्वत एवं विधाता हमें आंखें प्रदान करें. (३)
Savita Dev, Parvat and Vidhata give us eyes. (3)
ऋग्वेद (मंडल 10)
चक्षु॑र्नो धेहि॒ चक्षु॑षे॒ चक्षु॑र्वि॒ख्यै त॒नूभ्यः॑ । सं चे॒दं वि च॑ पश्येम ॥ (४)
हे सूर्य! हमारी आंखों को देखने की शक्ति दो. हम सारी वस्तुओं को देख सकें, इसके लिए हमें आंखें दो. हम सभी चीजों को सामूहिक रूप से देखें. (४)
O sun! Give us the power to see our eyes. For all things we can see, give us eyes. Let's look at all things collectively. (4)
ऋग्वेद (मंडल 10)
सु॒सं॒दृशं॑ त्वा व॒यं प्रति॑ पश्येम सूर्य । वि प॑श्येम नृ॒चक्ष॑सः ॥ (५)
हे सूर्य! हम तुम्हें भली प्रकार देख सकें. तुम सबको भली प्रकार देखने वाले हो. हम मानव की आंखों से सब कुछ विशेष रूप से देखें. (५)
O sun! We can see you well. You're going to see everyone well. We see everything specifically with the human eye. (5)