हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.31.8

मंडल 3 → सूक्त 31 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
स॒तःस॑तः प्रति॒मानं॑ पुरो॒भूर्विश्वा॑ वेद॒ जनि॑मा॒ हन्ति॒ शुष्ण॑म् । प्र णो॑ दि॒वः प॑द॒वीर्ग॒व्युरर्च॒न्सखा॒ सखी॑ँरमुञ्च॒न्निर॑व॒द्यात् ॥ (८)
उत्तम वस्तुओं के प्रतिनिधि एवं युद्ध में आगे रहने वाले इंद्र समस्त उत्तम पदार्थो को जानते हैं, उन्होंने शुष्ण असुर का वध किया है. परम मेधावी एवं गायों के इच्छुक हमारे मित्र इंद्र स्वर्ग से आकर हमें पापों से बचावें. (८)
Indra, the representative of the good things and who is ahead in the war, knows all the good things, he has killed the Shushna Asura. Our most meritorious and willing friend of cows, Indra, should come from heaven and save us from sins. (8)