ऋग्वेद (मंडल 3)
यो विश्वा॒भि वि॒पश्य॑ति॒ भुव॑ना॒ सं च॒ पश्य॑ति । स नः॑ पू॒षावि॒ता भु॑वत् ॥ (९)
जो सूर्य सब लोकों को विशेष रूप से देखते हैं एवं सभी वस्तुओं को वास्तव में जानते हैं, वे हमारे रक्षक हैं. (९)
The sun which sees all the realms in particular and really knows all things, they are our protectors. (9)