हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 7.66.15

मंडल 7 → सूक्त 66 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 7)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
शी॒र्ष्णःशी॑र्ष्णो॒ जग॑तस्त॒स्थुष॒स्पतिं॑ स॒मया॒ विश्व॒मा रजः॑ । स॒प्त स्वसा॑रः सुवि॒ताय॒ सूर्यं॒ वह॑न्ति ह॒रितो॒ रथे॑ ॥ (१५)
सात गतिशील अश्व मस्तक के भी मस्तक अर्थात्‌ सर्वोच्च स्थावर एवं जंगम के स्वामी एवं रथ में सवार सूर्य को विश्व के कल्याण के लिए संसार के समीप लाते हैं. (१५)
The seven moving horses also bring the head of the head, i.e., the lord of the supreme standing and movable, and the sun in the chariot closer to the world for the welfare of the world. (15)