हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 21.2.4

अध्याय 21 → खंड 2 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 21)

सामवेद: | खंड: 2
कया ते अग्ने अङ्गिर ऊर्जो नपादुपस्तुतिम् । वराय देव मन्यवे ॥ (४)
हे अग्नि! आप अंगों को प्रकाशित करते हैं. आप ऊर्जा बढ़ाते हैं. सब आप को अंगीकार करते हैं. हम आप के अलावा और किस को श्रेष्ठ देव मानें? (४)
O agni! You publish the organs. You increase energy. Everyone accepts you. Who else do we consider to be the best god besides you? (4)