यजुर्वेद (अध्याय 17)
पृ॒थि॒व्याऽअ॒हमुद॒न्तरि॑क्ष॒मारु॑हम॒न्तरि॑क्षा॒द् दिव॒मारु॑हम्। दि॒वो नाक॑स्य पृ॒ष्ठात् स्वर्ज्योति॑रगाम॒हम् ॥ (६७)
हम पृथ्वी से उच्च अंतरिक्षलोक में चढ़ते हैं. हम उच्च अंतरिक्षलोक से स्वर्गलोक में चढ्ते हैं. स्वर्गलोक से सूर्यलोक की ज्योति को प्राप्त होते हैं. (६७)
We climb from earth to higher space. We climb from the higher space world to heaven. They receive the light of the sun from heaven. (67)