हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 11.6.13

कांड 11 → सूक्त 6 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 11)

अथर्ववेद: | सूक्त: 6
प्रा॑णापा॒नौ व्री॑हिय॒वाव॑न॒ड्वान्प्रा॒ण उ॑च्यते । यवे॑ ह प्रा॒ण आहि॑तोऽपा॒नो व्री॒हिरु॑च्यते ॥ (१३)
प्राण और अपान प्रधान प्राण की विशेष वृत्तियां हैं. प्राण ही गेहूं, जौ तथा अपान बैल कहे जाते हैं. प्राण वायु जौ में आश्रित है तथा अपान वायु को ही गेहूं कहा जाता है. (१३)
Prana and Apana pradhan are special instincts of prana. Prana is called wheat, barley and apana bulls. Prana vayu is dependent on barley and apana vayu is called wheat. (13)