अथर्ववेद (कांड 11)
या दे॒वीः पञ्च॑ प्र॒दिशो॒ ये दे॒वा द्वाद॑श॒र्तवः॑ । सं॑वत्स॒रस्य॒ ये दंष्ट्रा॒स्ते नः॑ सन्तु॒ सदा॑ शि॒वाः ॥ (२२)
पांच प्रधान दिशाओं की जो देवियां हैं तथा बारह मासों के स्वामी जो देव हैं और स्वतंत्र रूप प्रजापति की जो दाढ़ें अर्थात् पक्ष, सप्ताह आदि हैं, वे हमें पाप से मुक्त करें. (२२)
May the goddesses of the five principal directions and the swami of twelve months who are gods and independently the molars of Prajapati i.e. Paksha, Week etc., free us from sin. (22)