अथर्ववेद (कांड 12)
यत्कृ॒षते॒ यद्व॑नुते॒ यच्च॑ व॒स्नेन॑ वि॒न्दते॑ । सर्वं॒ मर्त्य॑स्य॒ तन्नास्ति॑ क्र॒व्याच्चेदनि॑राहितः ॥ (३६)
जो पुरुष क्रव्याद अग्नि का सेवन करना न छोड़े, उस की कृषि, सेवनीय वस्तु, बहुमूल्य वस्तु आदि जो उस के पास है, वे शून्य के समान रह जाती हैं. (३६)
The man who does not stop consuming the agni, his agriculture, food items, valuable things, etc. which he has, remain like zero. (36)