अथर्ववेद (कांड 12)
सर्वा॑नग्ने॒ सह॑मानः स॒पत्ना॒नैषा॒मूर्जं॑ र॒यिम॒स्मासु॑ धेहि ॥ (४६)
हे अग्नि! तुम सब शत्रुओं को वश में करते हुए उन के बल और धन को हम में प्रतिष्ठित करो. (४६)
O agni! Subdue all your enemies and establish their strength and wealth in us. (46)