हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 14.2.29

कांड 14 → सूक्त 2 → मंत्र 29 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 14)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
या दु॒र्हार्दो॑युव॒तयो॒ याश्चे॒ह जर॑ती॒रपि॑ । वर्चो॒ न्वस्यै सं द॒त्ताथास्तं॑ वि॒परे॑तन ॥ (२९)
जो स्त्रियां दूषित हृदय वाली तथा वृद्धाएं हों, वे इसे तेज प्रदान करती हुई यहां से चली जाएं. (२९)
Women who have contaminated hearts and old women should leave here, giving it a sharp rise. (29)