अथर्ववेद (कांड 14)
नमो॑गन्ध॒र्वस्य॒ नम॑से॒ नमो॒ भामा॑य॒ चक्षु॑षे च कृण्मः । विश्वा॑वसो॒ ब्रह्म॑णाते॒ नमो॒ऽभि जा॒या अ॑प्स॒रसः॒ परे॑हि ॥ (३५)
गंधर्व के नमस्कार को हमारा नमस्कार है. उस की तेजस्वी आंखों के लिए हम नमस्कार करते हैं. हे सभी प्रकार के धनों के स्वामी! तुझे हम ज्ञानपूर्वक नमन करते हैं. तुम अप्सराओं के समान हमारी पत्तियों से दूर रहो. (३५)
We salute gandharva's namaskar. We salute him for his stunning eyes. O Swami of all kinds of wealth! We bow to you with knowledge. Stay away from our leaves like you nymphs. (35)