हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 19.27.12

कांड 19 → सूक्त 27 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 19)

अथर्ववेद: | सूक्त: 27
ये दे॑वा अ॒न्तरि॑क्ष॒ एका॑दश॒ स्थ ते॑ देवासो ह॒विरि॒दं जु॑षध्वम् ॥ (१२)
जो आदित्य नाम के देव अंतरिक्ष अर्थात मध्य भाग में एकादश हैं, वे इस हवन किए जाते हुए हवि का सेवन करें. (१२)
Those who are eleven in the divine space i.e. the middle part of the god named Aditya, they should consume Havi while performing this havan. (12)