हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.109.1

कांड 6 → सूक्त 109 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 109
पि॑प्प॒ली क्षि॑प्तभेष॒ज्यु॒ताति॑विद्धभेष॒जी । तां दे॒वाः सम॑कल्पयन्नि॒यं जीवि॑त॒वा अल॑म् ॥ (१)
पिप्वली अर्थात्‌ पीपल ने सभी ओषधियों का तिरस्कार कर दिया है तथा सभी रोगों को पीड़ित किया है. इंद्र आदि देवों ने अमृत मंथन के समय इस का निर्माण किया था, क्योंकि यही एक ओषधि सभी रोगों के निवारण में समर्थ है. (१)
Pipvali i.e. Peepal has despised all the medicines and has afflicted all diseases. Indra etc. gods had created it at the time of Amrit Manthan, because this one medicine is capable of preventing all diseases. (1)