अथर्ववेद (कांड 6)
यद्धाव॑सि त्रियोज॒नं प॑ञ्चयोज॒नमाश्वि॑नम् । तत॒स्त्वं पुन॒राय॑सि पु॒त्राणां॑ नो असः पि॒ता ॥ (३)
हे पुरुष! यदि तू यहां से भाग कर तीन योजन दूर चला जाता है, पांच योजन दूर चला जाता है अथवा उतनी दूर चला जाता है, जितनी दूर घोड़ा दिनभर में पहुंच सकता है, तू वहां से भी मेरे पास आ जा और मेरे पुत्रों का पिता बन. (३)
O man! If you run away from here and go three plans away, five plans away or go as far away as the horse can reach throughout the day, you come to me from there too and become the father of my sons. (3)