अथर्ववेद (कांड 7)
प्र॒जाव॑तीः सू॒यव॑से रु॒शन्तीः॑ शु॒द्धा अ॒पः सु॑प्रपा॒णे पिब॑न्तीः । मा व॑ स्ते॒न ई॑शत॒ माघशं॑सः॒ परि॑ वो रु॒द्रस्य॑ हे॒तिर्वृ॑णक्तु ॥ (१)
हे गायो! तुम संतान से युक्त, शोभन घास वाले प्रदेश में घास चरती हो तथा सुख से जल पीने योग्य तालाब आदि में जल पीती हो. तुम्हें कोई चोर न चुरा सके. बाघ आदि दुष्ट पशु भी तुम्हें न खा सकें. ज्वर के देव रुद्र के आयुध तुम्हें त्याग दें. (१)
O sing! You graze grass in a land full of children, beautiful grass and happily drink water in potable ponds etc. No thief can steal you. Even evil animals like tigers cannot eat you. Give up the weapons of Rudra, the god of fever. (1)